होली

होली

दुख-दर्द , रोग-शोक, दुर्गुण समस्त
होलिकाग्नि में भस्म हों

उत्साह-उमंग, उल्लास सद्गुण संग
नव-ऊर्जा, नव-सृजन हो

प्रसन्नचित्त, समाज-राष्ट्रहित
नित सत्कर्म संलग्न हो

इंद्रधनुषी पुष्पों-सा पुष्पित, पुलकित
फागुन की मस्ती में, मुदित मन हो

मथुरा-वृंदावन सा, गोप-गोपी सा
निश्छल प्रेममयी, जन-गण-मन हो

खुशियों भरे अबीर-गुलाल में
रंगा-रंगा, भीगा-भीगा
गुदगुदाता, हुलसाता
होली का त्योहार, हर दिन हो।

विधु गर्ग